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बांदा का डीएम कार्यालय भ्रष्टाचारियों का सुरक्षा कवच




मैने डीएम बांदा को ईमेल के द्वारा ग्राम पंचायत लौमर के भूतपूर्व ग्राम प्रधान इजहार के द्वारा किए कार्यों में भ्रष्टाचार की शिकायत किया था 
शिकायत यहां देखी जा सकती मैने शिकायत किया है डीएम बांदा को






लेकिन डीएम कार्यालय द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई तब मैने 2 माह बाद आरटीआई के माध्यम से ये जानने की कोशिश किया की मेरे द्वारा की गई शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई है

मेरे द्वारा किया गया आरटीआई आवेदन
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जब मैने आरटीआई किया तब मेरे द्वारा किया गया मेल देखा गया अगर मैं आरटीआई नहीं करता तो मुझे लगता है की ईमेल भी नहीं देखा जाता मतलब ये हुआ की डीएम कार्यालय में ईमेल और व्हाट्सएप द्वारा की गई शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं होती क्योंकि ईमेल देखते ही नहीं हैं 

मुझे लगता है की डीएम एटीएम केबिन में बैठे हुए किसी चौकीदार की तरह है जो सुबह आता है आठ घंटे ड्यूटी करता है और चला जाता है महीने की आखिर में अपनी पगार लेता है उसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की एटीएम मशीन में पैसे हैं या नहीं मुझे लगता है की जनपद बांदा के डीएम भी चौकीदार की तरह सिर्फ अपनी पगार लेते हैं पूरा दिन कुर्सी  तोड़ते हैं उन्हें इससे कोई  मतलब नहीं है की यूपी सरकार ने उन्हें जनता की शिकायत सुनने के लिए एक ईमेल और व्हाट्सएप नंबर दिया है और जनता से कहा गया है की डीएम कार्यालय में ईमेल तथा व्हाट्सएप से भी शिकायत कर सकते हो अगर उन्हें जनता की परवाह होती तो जरूर ईमेल चेक भी करते और सरकारी नंबर में चालू व्हाट्सअप भी चेक करते लेकिन उन्हें जनता से ज्यादा भ्रष्ट अधिकारी और प्रधानों की चिंता है।

आरटीआई करने के बाद मेरे द्वारा की गई शिकायत को जिला पंचायत के पास भेजा गया जब मैने अपनी शिकायत डीएम को किया है तो डीएम द्वारा पंचायत राज अधिकारी को जांच करने के  आदेश देना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हुआ मेरे आवेदन को पंचायत राज अधिकारी को भेजा गया और उसने ये कहते हुए जांच से इंकार कर दिया की किसी प्रधान की जांच करने के लिए डीएम के समक्ष गीता या कुरान में हाथ रखकर सपथ लेकर आवेदन करें तब जाकर डीएम महोदय जांच के आदेश देंगे।

आरटीआई का रिप्लाई देख सकते हैं
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पंचायतराज अधिकारी द्वारा भेजा गया आरटीआई का जवाब



तब मैने अपील किया है लेकिन अभी तक अपील का जवाब नहीं आया
आरटीआई प्रथम अपील




अब मुझे समझ में नहीं आता की जब मैने डीएम को आवेदन किया है तो फिर और कौन सी सपथ लेनी पड़ेगी क्या किसी प्रधान की जांच करवाने के लिए कोर्ट के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है और अगर सब कोर्ट को ही करना है तो ये डीएम एसडीएम किस लिए इन्हें जनता के टैक्स के पैसों से पगार क्यों दिया जाए।

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