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Showing posts from October, 2021

चिल्ला पुलिस थाना प्रशिक्षित अपराधियों के संगठित गिरोह का अड्डा है।

जनसुनवाई पोर्टल द्वारा की गई शिकायत पर पुलिस अधिकारियों की अंधाधुंध कमाई। मैने दिनांक 4 अक्टूबर 2021 को जनसुनवाई पोर्टल द्वारा पुलिस स्टेशन चिल्ला जनपद बांदा को मेरे पिता के साथ मारपीट तथा लूटपाट करने वालों के विरुद्ध नामजद शिकायत किया। नीचे मेरे द्वारा की गई शिकायत का स्क्रीन शॉट देख सकते हैं आईजीआरएस संख्या 40017021013538 दरअसल मेरी बेटी बहुत बीमार थी बांदा के डॉक्टरों ने उसे कानपुर रेफर कर दिया लेकिन मैने कहा की कानपुर नहीं मुंबई लेकर आओ और मैने अपने पिता और बीवी और बेटी का तत्काल टिकट निकाल कर उन्हें मुंबई आने को कहा। मेरे पिता जी गांव से बांदा जाने के लिए गाड़ी बुक करने चिल्ला गए थे जब रात 8 बजे चिल्ला से वापस लौट रहे थे तब मदनपुर निवासी अली शेर और उसके 2 साथियों ने मेरे पिता के साथ मार पीट किया और उनके 23000 रू भी छीन लिए मगर उस समय उन्हें अर्जेंट बांदा पहुंचना था इस लिए वो पुलिस थाना रिपोर्ट लिखाने नहीं गए क्योंकि 10 बजे रात को बांदा पहुंचना था। मेरी इस शिकायत पर चिल्ला थाना के उप निरीक्षक ओंकारनाथ मिश्रा ने मेरे पिता को धोखेबाज और झूठा साबित किया और मार पीट करने और लूटपाट करने ...

आओ जाने की क्या है यूपी सरकार का जनसुनवाई पोर्टल आम आदमी की सुनवाई या अपराधी सरक्षण पोर्टल

  आओ जाने क्या है यूपी सरकार का जनसुवाई पोर्टल  यूपी की अखिलेश सरकार ने आम आदमी की आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए ऑनलाइन शिकायत पोर्टल लांच किया था और उसका नाम रखा था जनसूवाई पोर्टल। जो वाकई में 2017 तक यानी जब तक अखिलेश सरकार थी इस पोर्टल के माध्यम से जनता की आवाज मुख्यमंत्री तक पहुंचती रही और इस पोर्टल के माध्यम से जनता को इंसाफ भी मिलता रहा  2017 में बीजेपी की सरकार आने के बाद जनसुनवाई बनी अपराधी बचाओ पोर्टल अखिलेश सरकार ने जब से जनसुनवाई पोर्टल लांच किया तब से मैं इस पोर्टल के माध्यम से सामाजिक तथा गांव के गरीब मजबूरों की आवाज उठाता रहा हूं। 2017 के पहले भी पुलिस अधिकारी या जिस विभाग में शिकायत की जाती थी उस विभाग के अधिकारी सही जांच ना करके गलत आख्या दिया करते थे लेकिन feed बैक देने के बाद बड़े अधिकारी उस शिकायत का निस्तारण खुद करते थे। मगर अब जबसे बीजेपी सरकार आई है तब से जनसुनवाई में बहुत सारे बदलाव कर दिए गए अब इस पोर्टल में शिकायतकरता किसी बड़े अधिकारी या किसी मंत्री को अपनी शिकायत नहीं भेज सकता मतलब अब शिकायत करता एक अपाहिज बना दिया गया है।  उदाहरण के तौर पर...