आओ जाने क्या है यूपी सरकार का जनसुवाई पोर्टल
यूपी की अखिलेश सरकार ने आम आदमी की आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए ऑनलाइन शिकायत पोर्टल लांच किया था और उसका नाम रखा था जनसूवाई पोर्टल। जो वाकई में 2017 तक यानी जब तक अखिलेश सरकार थी इस पोर्टल के माध्यम से जनता की आवाज मुख्यमंत्री तक पहुंचती रही और इस पोर्टल के माध्यम से जनता को इंसाफ भी मिलता रहा
2017 में बीजेपी की सरकार आने के बाद जनसुनवाई बनी अपराधी बचाओ पोर्टल
अखिलेश सरकार ने जब से जनसुनवाई पोर्टल लांच किया तब से मैं इस पोर्टल के माध्यम से सामाजिक तथा गांव के गरीब मजबूरों की आवाज उठाता रहा हूं। 2017 के पहले भी पुलिस अधिकारी या जिस विभाग में शिकायत की जाती थी उस विभाग के अधिकारी सही जांच ना करके गलत आख्या दिया करते थे लेकिन feed बैक देने के बाद बड़े अधिकारी उस शिकायत का निस्तारण खुद करते थे।
मगर अब जबसे बीजेपी सरकार आई है तब से जनसुनवाई में बहुत सारे बदलाव कर दिए गए अब इस पोर्टल में शिकायतकरता किसी बड़े अधिकारी या किसी मंत्री को अपनी शिकायत नहीं भेज सकता मतलब अब शिकायत करता एक अपाहिज बना दिया गया है।
उदाहरण के तौर पर अखिलेश सरकार में जब कोई नागरिक किसी पुलिस थाने में कोई शिकायत भेजता था और पुलिस थाने का अधिकारी गलत और झूठी आख्या देता था तो शिकायतकर्ता के पास ये विकल्प था की वो अपनी शिकायत पुलिस अधीक्षक या डीएम या डीआईजी या आईजी या मुख्यमंत्री तक भेज सकता था लेकिन अब योगी सरकार ने ये सभी विकल्प खतम कर दिए अब यदि कोई नागरिक शिकायत करता है तो पोर्टल में बैठे हुए कर्मचारी तय करते हैं की शिकायत किसे भेजे
मसलन मैने पुलिस थाने में लूटपाट की शिकायत किया लुटेरे और मारपीट करने वालों का नाम तथा संपर्क नंबर एड्रेस सब कुछ मैने पुलिस को बता दिया अब पुलिस अपराधी को गिरफ्तारी और एफआईआर से बचाने के लिए रिश्वत लेती है और शिकायतकर्ता की शिकायत की निराधार झूठ और मनगढ़ंत बता कर अपराधी को सुरक्षा प्रदान करती है अब शिकायतकर्ता के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं है अब शिकायतकर्ता दोबारा से सीबीसीआईडी की जांच की मांग करता है तब भी वही पुरानी आख्या दे दी जाती है फिर शिकायतकर्ता पुलिस अधिकारी के विरुद्ध शिकायत करता है तो वहां भी उसे वही आख्या थमा दी जाती है यानी जो थाना में बैठा घूसखोर पुलिस अधिकारी लिखकर दे दे वही सच है थाने में चोर पुलिस अधिकारी ही एसपी है वही डीएम है वही डीआईजी है वही आईजी है वही डीजीपी है वही सीबीआई है वही एनआईए है वही सीएम भी वही पीएम भी है वही सुप्रीमकोर्ट है वही राष्ट्रपति है उसके ऊपर कोई नहीं है यानी योगी सरकार ने घूसखोर पुलिस अधिकारी को घूस खाने लाइसेंस दे दिया है।
यानी जनसुनवाई पोर्टल अब अपराधी और बेईमान चोर घूसखोर अधिकारियों की नई दुकान बन गई है।
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